फाड़ी गई कॉपी, जलाए गए पन्ने, UP टीचर्स भर्ती घोटाला

असिस्टेंट टीचर की नियुक्ति रद्द, 68 हजार भर्तियों की होगी CBI जांच… जानें- कैसे पता चला यूपी टीचर्स भर्ती घोटाले के बारे में..

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी में असिस्टेंट टीचर की 12460 भर्ती रद्द कर दी है. जिसके बाद कोर्ट ने प्राइमरी स्‍कूलों में असिस्टेंट टीचर के 68 हजार 500 खाली पदों पर की गई भर्ती की पूरी प्रक्रिया की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए. वहीं, इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट टीचर्स की भर्ती को लेकर सरकार को एक बड़ा झटका लगा है. टीचर्स भर्ती के रद्द हो जाने और सीबीआई जांच के फैसले के बाद हड़कप मच गया है. 68 हजार 500 पदों पर भर्ती प्रकिया में सामने आए भ्रष्टाचार के मामले कोर्ट ने 26 नवंबर को जांच की प्रगति रिपोर्ट भी मांगी है.

आइए पहले जानते हैं ये घोटाला कैसे सामने आया…  

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग ने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (यूपीटीटेट) में उत्तरपुस्तिका की चेकिंग को लेकर अनियमितता पाई गई थी. बता दें, रिजल्ट जारी होने के बाद शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी के प्रमाण मिले थे.

यूपीटीटेट परीक्षा का आयोजन इसी साल मई में महीने में हुआ था. जिसमें 68 हजार से ज्यादा असिस्टेंट टीचर्स को चुना गया था. लेकिन बाद में कई ऐसे प्रमाण सामने आए जहां कई अंक पत्रों से छेड़छाड़ की गई थी, कॉपियों के बारकोड बदले गए थे सही जवाबों पर भी शून्य अंक देने की उदाहरण सामने आए थे. उत्तर पुस्तिकाओं को बदला गया था ..जिसके बाद लगातार इस भर्ती पर सवाल उठ रहे थे.

‘0’ नंबर से खुली पोल

इस मामले में हाई कोर्ट में कुल 41 याचिकाएं दायर की गई थी जिसमें परीक्षा में धांधली बारकोड के बावजूद उत्तर पुस्तिकाएं बदलने और सही जवाबों पर भी 0 अंक देने का मामला था जिसके खिलाफ कई अभ्यर्थियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था. परीक्षा में धांधली, बार कोड बदलने और सही जवाब देने के बावजूद 0 अंक देने के आरोप में 41 याचिकाएं अदालत में डाली गई थी.

कोर्ट ने लिया कड़ा फैसला

जैसे ही असिस्टेंट टीचर्स भर्ती को लेकर लगातार कोर्ट शिकायतें दर्ज होने लगी तो कोर्ट ने सबकी एक साथ सुनवाई की. शुरूआती जांच की रिपोर्ट के बाद अदालत ने सरकार को फटकार लगाई थी. अदालत ने कहा कि जिस तरह की गड़बड़ हुई है, उनके बाद हम चुप होकर नही बैठ सकते.

योग्य लोगों को भा जांच के बाद नौकरी नहीं दी गई. परीक्षा जांच कराने वाली एजेंसी ने उत्तर पुस्तिकाओ के बार कोड बदल दिये. जिसके बाद भी उस एजेंसी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नही की गई. अब अदालत ने पूरे मामले मे सख्ती बरतते हुए सीबीआई को आदेश दिया है कि पूरे मामले की जांच करें और अगले 6 महीने के भातर जांच रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करें.

जानें- यूपीटेट- 2018 परीक्षा में कितने अभ्यर्थी हुए थे शामिल

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में करीब 1 लाख 7 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे. रिपोर्ट्स के अनुसार इस परीक्षा में 41556 (38.52 या 39 प्रतिशत) अभ्यर्थी सफल हुए थे. 27 मई को इसकी लिखित परीक्षा हुई थी जबकि इसी साल 13 अगस्त को इसका रिजल्ट घोषित किया गया था.

भले ही 41 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों को इसमें सफल दिखाया गया लेकिन कई अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन पर ही सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, हाईकोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश के साथ ही कई कड़ी टिप्पणी भी की है.

फाड़ी गई कॉपी, बदले और जलाए गए पन्ने

अधिकारियों ने अपने अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए अधिकारियों का दुरुपयोग किया है जिन अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में कम मार्क्स मिले उनके अंक बढ़ा दिए गए, कुछ अभ्यर्थियों को फेल दिखाने के लिए कॉपी फाड़ दी गई, कई के पन्ने बदल दिए गए. अभ्यर्थियों की कॉपियां जला दी गईं.

इस मामले पर सरकार को फटकारते हुए अदालत ने कहा है कि जब बारकोडिंग करने वाली एजेंसी ने खुद ही स्वीकार किया है कि तकरीबन दर्जनभर अभ्यर्थियों की कॉपियां बदली गई है इसके बावजूद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज क्यों नही करवाई गई?

6 महीने में जांच पूरी करने का आदेश

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि इस भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी साबित होने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. कोर्ट ने सीबीआई को इस मामले में अपनी प्रगति रिपोर्ट 26 नवंबर को पेश करने के आदेश देने के साथ-साथ मामले की जांच 6 महीने  में पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं. वहीं कई ऐसे सवाल है जिनका जवाब मिलना बाकी है और जो सरकार के इस बड़ी भर्ती पर सवाल खड़े कर रहे हैं योगी सरकार ने इसके खिलाफ बड़ी बेंच में अपील करने का मन बनाया है लेकिन हाई कोर्ट के इस फैसले ने योगी सरकार की किरकिरी जरूर करा दी है

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